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पटना में 239 होटल और निजी अस्पतालों पर लटकी सीलिंग की तलवार, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर 15 जून के बाद होगी कार्रवाई

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मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद बिहार सरकार और अग्निशमन विभाग अलर्ट मोड में हैं। पटना के 239 होटल और निजी अस्पताल फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं करने पर 15 जून के बाद सील किए जा सकते हैं।

पटना/आलम की खबर:मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद बिहार सरकार ने पूरे राज्य में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। राजधानी पटना में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी करने वाले होटलों और निजी अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। इसी क्रम में राजधानी के सैकड़ों होटल और अस्पताल प्रशासन की निगरानी में हैं तथा उन्हें अंतिम अवसर दिया गया है कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करें।

मुजफ्फरपुर में हुई दुखद घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक संस्थानों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के लिए बनाए गए नियमों का पालन आखिर कितनी गंभीरता से किया जा रहा है। इस हादसे के बाद राज्य सरकार ने न केवल घटना की जांच के निर्देश दिए हैं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक स्तर पर निरीक्षण अभियान भी शुरू कर दिया है। राजधानी पटना इस अभियान का प्रमुख केंद्र बन गई है जहां होटलों और अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की जा रही है।

अग्निशमन विभाग की ओर से किए गए निरीक्षणों में कई संस्थानों में गंभीर कमियां सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार अनेक भवनों में आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की कमी पाई गई है। कुछ स्थानों पर फायर अलार्म सिस्टम या तो स्थापित नहीं हैं या फिर लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। कई भवनों में आपातकालीन निकास मार्गों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। ऐसे हालात में यदि आग जैसी आपदा उत्पन्न हो जाए तो लोगों की जान बचाना बेहद मुश्किल हो सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े निजी अस्पतालों को लेकर भी विभाग की चिंता बढ़ी हुई है। अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की आगजनी की घटना गंभीर रूप धारण कर सकती है। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी बुनियादी व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं। कहीं फायर फाइटिंग सिस्टम अपडेट नहीं किए गए हैं तो कहीं विद्युत वायरिंग पुरानी और जोखिमपूर्ण स्थिति में है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और उपकरणों के रखरखाव की अनदेखी भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।

होटलों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं पाई गई। राजधानी में हर दिन हजारों लोग विभिन्न कार्यों से आते हैं और होटलों में ठहरते हैं। ऐसे में इन भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक हो जाता है। निरीक्षण के दौरान कई होटलों में अग्निशमन यंत्रों की कमी, आपातकालीन निकास व्यवस्था में खामियां और सुरक्षा प्रशिक्षण की कमी जैसी समस्याएं सामने आईं। विभाग का कहना है कि होटल संचालकों को कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन कुछ संस्थानों ने अब तक अपेक्षित सुधार नहीं किए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जिन संस्थानों को पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, उनमें से कई ने अब तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। ऐसे प्रतिष्ठानों को अंतिम चेतावनी दी गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में सीलिंग, लाइसेंस संबंधी कदम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी शामिल हो सकती हैं।

जिला स्तर पर चल रहे निरीक्षण अभियान में यह भी देखा जा रहा है कि भवनों में आग लगने की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, पानी की उपलब्धता, आपातकालीन सीढ़ियां और प्रशिक्षित स्टाफ जैसे पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि केवल कागजी अनुपालन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कार्यशील होनी चाहिए।

उधर, राज्य सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि अस्पतालों और होटलों जैसी जगहों पर सुरक्षा मानकों का पालन करना केवल कानूनी दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि किसी संस्थान की लापरवाही के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई स्वाभाविक है।

ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने भी संकेत दिए हैं कि मुजफ्फरपुर की घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि राज्यभर के अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्थान संचालकों को भी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। समय-समय पर कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना, अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव करना और भवनों की विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच कराना आवश्यक है। सुरक्षा में किया गया निवेश किसी भी संभावित आपदा से होने वाले बड़े नुकसान को रोक सकता है।

फिलहाल राजधानी पटना में चल रही कार्रवाई ने होटल और अस्पताल संचालकों के बीच हलचल बढ़ा दी है। कई संस्थानों ने सुरक्षा मानकों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने प्रतिष्ठान निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक सुधार कर पाते हैं और कितनों पर प्रशासनिक कार्रवाई होती है। लेकिन इतना तय है कि मुजफ्फरपुर की दुखद घटना के बाद बिहार में फायर सेफ्टी को लेकर अब पहले जैसी ढिलाई की संभावना नहीं है।

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